प्रतिबंध के बावजूद पान दुकानों पर गुटखा की बिक्री जोरों पर …
गुटखा माफियाओ पर कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद…
दोगुनी कीमत पर बाजार में पान मसाला उपलब्ध…
चैनपुर/गुमला: चैनपुर प्रखण्ड मुख्यालय के पान दुकानों एवम किराना दुकान मे धड़ल्ले से पान मसाला (गुटखा) का बिक्री जोरों पर कमला पसंद गुटखा 10/-मे 2पीस राजश्री गुटका 10/-मे 2पीस, रजनीगंधा गुटका का mrp19/-पर दुकानदार बेच रहे हैं 25/Rs- मे सिग्नेचर का mrp 10/-पर बिक रहा है 15/-रुपये मे जबकि झारखण्ड स्वास्थ्य विभाग द्वारा 17-02-2025 से झारखण्ड राज्य मे पूरी तरह से गुटखा बैन करने का निर्देश दिया हैं, परन्तु स्वास्थ्य विभाग एवम पुलिस प्रसासन के नाक के निचे से चैनपुर प्रखण्ड मुख्यालय तथा सभी ग्रामीण क्षेत्रों मे धड़ल्ले से गुटखा बिक्री की जा रही है चंद पैसों के मुनाफा के लालच में दुकानदार युवाओं को सीधे-सीधे मौत बेच रहे हैं। कई गंभीर बीमारियों के कारक गुटका है परंतु ना तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर है ना ही प्रशासन ना सामाजिक तौर पर दुकानदार इसको बेचने से गुरेज कर रहे हैं।
11 ब्रांड के पान मसालाओं पर लगा है प्रतिबंध-
रजनीगंधा, विमल शिखर, पान पराग, दिलरुबा,राज निवास, सोहरत,मुसाफिर, मधु,बाहार, पान पराग प्रीमियम इत्यादि।
पान मसाला के नमूनों के जांच में हानिकारक मैग्नीशियम कार्बोनेट की मात्रा पाए जाने पर लगाई गई रोक
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा है।
•मंत्री ने कहा महिलाएं लग रही थी गुहार उनके बच्चे एवम परिवार के सदस्य नशे के गिरफ्त में होकर अपना जीवन नष्ट कर रहे हैं।
•उन्होंने अधिकारियों एवं आम जनता से अपील करते हुए कहा था कि इसे चुनौती के रूप में ले और झारखंड को गुटका मुक्त बनाने में सहयोग करें
- गुटका एवं पान मसाले के कारण से कैंसर जैसी घातक बीमारी तेजी से फैल रही है हमारे युवा इससे अधिक प्रभावित है
उन्होंने कहा कि पान मसाला एवं गुटखा बेचने भंडारण करने या सेवन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गुटखा माफिया एवं अवैध कारोबारी पर नजर रखी जाएगी।

महज 3 महीने में ही सरकार के सभी आदेश को सरकारी कर्मी भूल बैठे हैं और गुटखा बेचने वालों पर कृपा बनाए हुए हैं एक तरफ जहां राज्य सरकार हर जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रचार वाहन रवाना कर नशा मुक्त बनाने हेतु बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार कर रही है वही सरकारी तंत्र गुटखा बेचने वाले माफियाओं पर चुप्पी साधे बैठी है जिसका असर सीधे-सीधे युवाओं एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर पढ़ रहा है। निश्चित तौर पर गुटखा समाज के लिए एक अभिशाप बनकर उभरी है और युवाओं की जीवन को लील रही है। मगर इन बाबू साहब लोगों को कौन बतलाएं इन्हें तो बस काम नहीं करने का बहाना चाहिए धड़ल्ले से पान दुकानों एवं किराना दुकान में दोगुनी कीमतों पर गुटका उपलब्ध है। क्या ऐसे बाबू सब लोगों के रहते झारखंड को नशा मुक्त प्रदेश बनाने का सपना सकार हो पाएगा। जिस तरह से सरकारी तंत्र कार्य कर रही है उससे तो यह उम्मीद रखना बिल्कुल ही बेमानी होगी। वही कार्रवाई नहीं होने से गुटखा बेचने वालों के हौसले बुलंद है।..




