प्रकृति संरक्षण का दावा सिर्फ कागजों पर चैनपुर में अवैध बांग्ला ईट भट्ठा कार्य जोरो पर, प्रशासनिक कार्रवाई के नकली दावे।
गुमला चैनपुर :- चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों विभिन्न जगहों पर धड़ल्ले से बांग्ला भट्ठा मिट्टी ईंट बनाने व्यवसायिक कार्य चल रहा है। प्रखंड के किसी अधिकारी ने भी इन्हें रोकने टोकने की अभी तक जहमत नहीं की है
जबकि गुमला उपायुक्त के द्वारा सख्त निर्देश दिया गया है,बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा सरकार का गाइडलाइन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986(EPA ) IPC/BNS के तहत मिट्टी ईंट (बांग्ला) भट्ठा को बंद करना है।
तथा सरकारी आदेश का अवहेलना करना और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कारवाई करने का निर्देश दिया गया है।
परन्तु अधिकारीयों की उदासीनता रवैया कहें या अवैध कार्यों के प्रति समर्थन जाता रहे हैं ये तो अधिकारी ही समझें।
यही कारण है की जितने चिमनी ईट भट्ठा का लाइसेंस रद्द करते हुए उसे रिनवल नहीं किया जा रहा है। और सरकार का प्रयास है की फ्लाई एश, स्टोन डस्ट, सिमेंट के माध्यम से निर्मित ईंटो से ही सभी तरह का भवन निर्माण एवं सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाना है, लेकिन जिला उपायुक्त के सख्त निर्देश के बौजूद क्षेत्र के कुछ माफिया किस्म के लोगों को प्रसासन का तनिक भी भय नहीं। सूत्रों के हवाले से खबर मिला है की प्रशासन के मिली भगत से इन अवैध कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।
किन किन जगहों पर चल रहा है अवैध बांग्ला ईंट भटठों का काम
1.बेंदोरा पंचायत के छतरपुर ग्राम के दाहिने ओर बम्हनी जाने वाले चलन्त रास्ते में।
2.कतिंग पंचायत के सेमला बरटोली ग्राम में
3.लंगड़ा मोड़ के इर्द गिर्द एवं कटकही ग्राम में।
4.कुरुमगढ़ ग्राम के इर्द गिर्द धड़ल्ले से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है और प्रशासन इन सभी संचालित अवैध कार्यों क़ो रोकने का प्रयास नहीं किया गया है।
इन अवैध गतिविधियों की जानकारी जैसे ही जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा को हुई उन्होंने ने कहा प्रकृति संरक्षण की बात सिर्फ कागजों में सीमित है अधिकारियों को इसमें ध्यान देने की आवश्यकता है चैनपुर अनुमंडल क्षेत्र में माफिया हावी है चाहे वह अवैध बांग्ला ईट भट्ठा हो अवैध पत्थर खनन एवं बालू का खनन सभी अपने चरम पर है जबकि गरीब आम व्यक्ति अगर यही कार्य करें तो उसे पर प्रशासन का डंडा चलने लगता है माफियाओं के कृत पर प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं अवैध बांग्ला ईट निर्माण को प्रशासन अभिलंब रोक लगाए। खनन विभाग सिर्फ बालू के कारोबार पर नजर बनाए हुए हैं जबकि बांग्ला ईट भट्ठा लगाने वाले लोग कई वर्षों से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं। प्रशासन इन सभी लोगो पर कार्रवाई नहीं करती है तो आला अफसर को इसकी जानकारी दी जाएगी और कारवाई की माँग की जाएगी।







