रासायनिक खाद यूरिया की कालाबाजारी: किसान परेशान, प्रशासन पर उठे सवाल
चैनपुर/गुमला : गुमला जिला का सुदूरवर्ति चैनपुर प्रखंड में यूरिया खाद की खुलेआम कालाबाजारी से किसानों में मचा त्राहिमाम, कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है, जिससे किसान बुरी तरह से परेशान हैं। सरकार द्वारा निर्धारित कीमत ₹266 प्रति बोरी होने के बावजूद, सोहन चौक स्थित रघुवीर बीज भंडार जैसी एवं अन्य दुकानों पर यूरिया ₹500 तक में बेची जा रही है, जो कि लगभग दोगुना है। किसानों को मजबूर होकर इस बढ़ी हुई कीमत पर खाद खरीदना पड़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।किसानों का कहना है कि गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने पहले ही सभी खाद डीलरों को सख्त चेतावनी दी थी कि वे खाद को तय कीमत से ज़्यादा पर न बेचें, लेकिन इस चेतावनी का कोई असर दिख नहीं रहा। यह दर्शाता है कि प्रखंड स्तर पर प्रशासन की तरफ से निगरानी में भारी लापरवाही बरती जा रही है, जिसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं।जनप्रतिनिधि और समाजसेवी ने उठाए सख्त कदम उठाने की मांग यह मुद्दा अब किसानों की परेशानी के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

जिला परिषद सदस्य ने इस स्थिति को ‘बेहद शर्मनाक’ बताते हुए कहा, “एक तरफ किसान मौसम की मार झेल रहे हैं, दूसरी तरफ प्रशासन और दुकानदारों की मिलीभगत ने उनकी कमर तोड़ दी है। अगर प्रखंड प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता तो किसानों को यह दिन नहीं देखना पड़ता।” उन्होंने मांग की कि ऐसे दुकानदारों पर न केवल जुर्माना लगाया जाए, बल्कि उनका लाइसेंस भी रद्द किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई हो।

समाजसेवी अनूप संजय टोप्पो ने इस स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, “सरकार किसानों को मदद देने की कोशिश कर रही है, लेकिन प्रखंड स्तर के कुछ अफसर और दुकानदार मिलकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। अगर प्रशासन सख्त कदम उठाए यूरिया की कालाबाजारी करने वालों दुकानदारों पर कारवाई करें।”

जेएमएम जिला उपाध्यक्ष एवं बेंदोरो पंचायत मुखिया सुशील दीपक मिंज ने भी इस मिलीभगत की पुष्टि करते हुए कहा, “किसानों को खाद समय पर नहीं मिला और जब मिला तो दुगुने दाम पर। यह साफ दिखाता है कि दुकानदार और प्रशासन दोनों मिलीभगत से किसानों को लूट रहे हैं। ऐसे लोगों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
यह स्पष्ट है कि यूरिया की कालाबाजारी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और भी खराब कर दिया है, और वे इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई करेगा ताकि यह लूट बंद हो सके। यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस मामले पर क्या कदम उठाता है।




