नाबार्ड के झारखंड क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 44वां स्थापना दिवस रांची में भव्य रूप से मनाया गया। कार्यक्रम में शासन, बैंकिंग, शिक्षा, उद्योग एवं विकास क्षेत्रों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, माननीय मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, झारखंड सरकार रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में नाबार्ड द्वारा ग्रामीण झारखंड में किए गए विकास कार्यों की सराहना की और कहा कि राज्य सरकार तथा नाबार्ड के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यक्रमों का विस्तार और प्रभाव और बढ़ सकता है।
उन्होंने एसएलबीसी (SLBC) और बैंकों से आग्रह किया कि वे ऋण वितरण की जमीनी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें और परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर किसानों और ग्रामीण उद्यमियों तक समय पर एवं सुलभ ऋण पहुंचाना सुनिश्चित करें।
ग्रामीण उद्यमिता पर पैनल चर्चा
इस अवसर पर “समावेशी विकास हेतु ग्रामीण उद्यमिता का संवर्धन” विषय पर एक गंभीर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें भाग लिया: श्री के. श्रीनिवासन, आईएएस, सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग; श्रीमती अनामिका शर्मा, अधिकारी-प्रभारी, भारतीय रिज़र्व बैंक, रांची; श्री प्रशांत गट्टानी, अध्यक्ष, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री; डॉ अमन कुमार, प्रोफेसर, आईआईएम रांची; श्री निशांत कुमार, उद्यमी
वक्ताओं ने ग्रामीण युवाओं की भागीदारी, वित्त तक पहुँच, विपणन अवसंरचना तथा क्षमता निर्माण जैसे पहलुओं पर विचार व्यक्त किए और झारखंड में ग्रामीण उद्यमिता के संवर्धन में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की।
नाबार्ड प्रकाशनों का विमोचन
माननीय मंत्री द्वारा निम्मलिखित महत्वपूर्ण पुस्तिकाओं का विमोचन किया गयाः
“झारखंड में नाबार्ड 2024-25” राज्य में नाबार्ड की प्रमुख पहलों, वित्तीय सहायता एवं विकासात्मक कार्यों का विवरण
“यूनिट कॉस्ट् पुस्तिका 2024-25” बैंक और अन्य हितधारकों के लिए वित्त पोषित गतिविधियों की योजना हेतु मार्गदर्शिका
श्री गौतम सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड झारखंड ने अपने स्वागत भाषण में नाबार्ड की विकासपरक दृष्टि पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, कृषि और गैर-कृषि बुनियादी ढांचे में सुधार, किसान समूहों को समर्थन देने और राज्य भर में वित्तीय समावेशन में तेजी लाने के लिए नाबार्ड की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और 24 साल पहले झारखंड में नाबार्ड की स्थापना के बाद से उल्लेखनीय पहलकदमों को भी रेखांकित किया।
उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित समाधान और जलवायु सहनशील विकास मॉडल को भविष्य का रास्ता बताया और कहा कि नाबार्ड नीति और क्रियान्चयन के बीच सेतु का कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम का समापन आशा एवं संकल्प के साथ हुआ कि नाबार्ड, राज्य सरकार एवं अन्म भागीदार संस्थाओं के सहयोग से झारखंड में समावेशी, न्यायसंगत एवं सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।

















